Thursday, August 9, 2018

हरिवंश नारायण सिंह कौन है?

राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन के पद के लिए, चुनाव आज हुआ और एनडीए के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह ने 125 वोट जीते। चुनाव कागजात लगाने के तुरंत बाद सुबह 11 बजे आयोजित किया गया था। केजे से कांग्रेस टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए पीजे कुरियन की सेवानिवृत्ति के बाद जून के बाद से डिप्टी चेयरमैन का पद रिक्त पड़ा था।

  • हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था। 
  • रिपोर्ट के अनुसार, सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की जाती है और रांची में रहती है। वह जेडी-यू के पहले समय के सांसद हैं। 
  • वह अप्रैल 2014-अप्रैल -2020 के लिए चुने गए हैं। 
  • वह एक पूर्व पत्रकार और हिंदी दैनिक प्रभात खबर के पूर्व संपादक-इन-चीफ हैं। 
  •  हरिवंश नारायण सिंह पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार भी थे
  • हरिवंश ने अपनी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा गांव के सटे टोला काशी राय स्थित स्कूल से शुरू की। उसके बाद, जेपी इंटर कालेज सेवाश्रम (जयप्रकाशनगर) से 1971 में हाईस्कूल पास करने के बाद वे वाराणसी पहुंचे। वहां यूपी कॉलेज से इंटरमीडिएट और उसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक किया और पत्रकारिता में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की।
  • अप्रैल 2014 में उन्हें राज्यसभा के लिए बिहार से चुना गया। उनका कार्यकाल अप्रैल 2020 में पूरा होगा। हरिवंश को जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा के दौरान ही वर्ष 1977-78 में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह मुंबई में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में उनका चयन हुआ। 
  • इसके बाद वे टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग में 1981 तक उप संपादक रहे। 1981-84 तक हैदराबाद एवं पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की और वर्ष 1984 में इन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्तूबर तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित रविवार साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे।
सोमवार को राज्यसभा अध्यक्ष एम। वेंकैया नायडू ने सत्तारूढ़ एनडीए और एकजुट विपक्ष के बीच प्रतियोगिता की तारीखों की घोषणा की थी। चुनाव एक करीबी संबंध होने की संभावना है क्योंकि विपक्षी दल की संख्या बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए पर संख्याओं के मुकाबले बढ़त है।

संवाददाताओं से बात करते हुए, हरिवंश ने कहा था कि वह सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवार थे। उन्होंने कहा, "मुझे मीडिया के माध्यम से पता चला है कि मैं राज्यसभा के उप सभापति पद के लिए एनडीए का उम्मीदवार हूं। मैं एनडीए में पार्टियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। मुझे आशा है कि मैं सफल हो जाऊंगा।" पीएसी चुनाव में उनके नुकसान के बारे में पूछे जाने पर हरिवंश ने कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में लड़ा। उन्होंने कहा, "मैं एनडीए के उम्मीदवार (उपाध्यक्ष) हूं और वहां बहुत अधिक समर्थन होगा।"

दिलचस्प बात यह है कि हरिवंश ने बुरी तरह खो दिया, लोक लेखा समिति (पीएसी) में दो रिक्तियों को भरने के लिए मतदान में सोमवार को केवल 26 वोट प्राप्त हुए। टीडीपी का सीएम राज्यसभा में रमेश को 106 वोट मिले और पीएसी के लिए चुने गए।

Monday, April 24, 2017

वरिष्ठ नेता बच्चा पाठक का निधन

शेर ए बलिया, गरीबों के मसीहा जैसे उपनामों से विभूषित पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बच्चा पाठक का निधन वाराणसी के गैलेक्सी हॉस्पिटल में रविवार की शाम 5 बजे के करीब हो गया. 93 की उम्र पार कर चुके बच्चा पाठक का राजनीतिक सफर रेवती ब्लाक के प्रमुख बनने के बाद 1966 से प्रारम्भ हुआ था. प्रदेश में पाठक को वरिष्ठ कांग्रेसी के रूप में जाना जाता रहा है. पचास वर्षों से भी अधिक दिनों की राजनीतिक यात्रा में पूर्व मंत्री सात बार विधायक रहे.
1967 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ कर प्रदेश की राजनीति में कदम रखा, किन्तु वे चुनाव हार गए. पुनः 1969 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े एवं जीत हासिल किए. तब से पाठक पीछे मुड़ कर नहीं देखे. 71, 74, 77 एवं 80 में उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर बांसडीह विधान सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किए. 1984 में किन्हीं कारण से उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिल सका. 1989 में कांग्रेस से फिर चुनाव लड़े, किन्तु असफल रहे. पुनः बांसडीह से 91 एवं 96 में वो  लगातार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते.
कहा जा सकता है कि एक विधानसभा से एवं एक ही पार्टी से सात बार विधायक बनने का रिकार्ड जनपद में बच्चा पाठक के नाम है. श्री पाठक उत्तर प्रदेश सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रहे एवं कांग्रेस में वरिष्ठ सांगठनिक पदों पर रह कर दायित्वों का बखूबी निर्वहन किए. 1977 की जनता पार्टी की लहर में जब कांग्रेस का लगभग सफाया हो चुका था, उस वर्ष का चुनाव जीत कर पाठक काफी चर्चित रहे. तभी से कांग्रेस जनों ने उन्हें शेरे बलिया कह कर पुकारना शुरू किया. बच्चा पाठक चार इंटर कॉलेजों के प्रबंधक एवं एक महाविद्यालय के संस्थापक रहे हैं.
उनके भतीजे अशोक पाठक ने बताया कि पूर्व मंत्री का पार्थिव शरीर पैतृक आवास खानपुर में देर रात पहुंचेगा. सुबह जनता दर्शन के बाद दोपहर के बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. पचरुखिया गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
बांसडीह विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पाठक जी की मौत से पूरा प्रदेश दुःखी है. ईश्वर दिवंगत को आत्मिक शांति प्रदान करें. बीते चुनाव में पाठक जी का योगदान कभी भूला नहीं जा सकता – रामगोविंद चौधरी (उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष), बलिया लाइव प्रतिनिधि रविशंकर पांडेय से बातचीत में.

पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बच्चा पाठक का निधन वाराणसी के गैलेक्सी हॉस्पिटल में.


 
 पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बच्चा पाठक का निधन वाराणसी के गैलेक्सी हॉस्पिटल में रविवार की शाम 5,30 बजे के करीब हो गया। इन्हें शेरे बलिया के नाम से भी जाना जाता था। 89 वर्ष की उम्र पार कर चुके श्री पाठक का राजनैतिक सफर बलिया जिले के रेवती ब्लाक के प्रमुख बनने के बाद 1966 से प्रारम्भ हुआ था।

प्रदेश में उनको वरिष्ठ कांग्रेसी के रूप में जाना जाता था। 50 वर्षों से भी ज्यादा की  राजनीतिक यात्रा में पूर्व मंत्री सात बार विधायक रहे। बच्चा पाठक उत्तर प्रदेश सरकार में दो बार काबीना मंत्री रहे एवं कांग्रेस संगठन के वरिष्ठ पदों पर रह कर दायित्वों का बखूबी निर्वाहन किये।

1967 में पहली  बार कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने बांसडीह विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड कर प्रदेश की राजनीति में कदम रखा किन्तु वे चुनाव हार गए।1967 में कांग्रेस ने उन्हें बांसडीह से टिकट दिया। किन्तु वे चुनाव हार गए।

पुन: 1969 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े एवं जीत हासिल किया। तब से श्री पाठक पीछे मुड़ कर नहीं देखे। विधानसभा चुनाव 1971,1974,1977 एवं 1980 में उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर बांसडीह का नेतृत्व किया। 1984 में किन्ही कारण से उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिल सका। 1989 में कांग्रेस से चुनाव लड़े किन्तु असफल रहे।

पुन:बांसडीह से 1991 एवं 1996 में वो  लगातार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। कहा जा सकता है कि एक ही विधानसभा से एवं एक ही पार्टी से सात बार विधायक बनने का रिकार्ड बलिया  में बच्चा पाठक के नाम है।

1977 की जनता पार्टी की लहर में जब कांग्रेस का लगभग सफाया हो चुका था उस वर्ष का चुनाव जीत कर काफी चर्चित रहे। तभी से कांग्रेस जनों ने उन्हें शेरे बलिया कह कर पुकारना शुरू किया।

पूर्व मंत्री के भ्रातृज अशोक पाठक ने बताया कि पूर्व मंत्री का पार्थिव शरीर खानपुर में सोमवार सुबह जनता दर्शन के बाद दोपहर के बाद उनकी शव यात्रा निकाली जाएगी। पचरुखिया गंगा तट पर अंतिम संस्कार किया जायेगा।

Thursday, June 23, 2016

Please help them if anyone has humanity and power …

I got a massage from Ajita Pandey, want some help...

Sir, myself Ajita Pandey resident of Japlinganj, Ballia. Sir, on 19th June some 15-20 antisocial persons forcefully entered in my residential house misbehaved, abused and threatened me to vacate my house within 2 days otherwise they will forcefully throw my belongings. Pl do needful and save the life of my family who are very much afraid. They came with Bollero number UP 60X 4001 and some motor bykes. Pl do needful and request you with folded hands to take initiative in such an urgency pl. Sir, further we came to know that they are man & people of one property dealer namely Karimulla Kabadi of Ballia.

Pl help my family at Ballia who are very much afraid. Sir, the OC Japlinganj is not taking any serious action against the group, who are forcefully entering in my house in day light and his opinion advising us to leave and vacate our own house. By encouraging from his inaction, the group of Karimulla Kabadi today on 21st June also came to our house and forcefully broken the lock of 5th floor and put their lock, inside which our day to day belongings and study books of our children are there. Sir, it is fact that we can not continue in our own house without the help of police althogh status quo order has been passed by the civil court. But, those gunda type antisocial people are not having respect and regards of court order and  voilating the court order.

Sir we are helpless and unable to understand what to do, pl help us and advise us what to do. Sir, no male member of our family except me with small kids are now present here. Today on 23rd June also they came to our residence at about 4 pm, abused us in vulgar language and shifted some of my belongings and households. We informed to IC/Japlinganj, Ballia, but no action from his side rather he is forcing us to leave our own house. Sir, we are very much afraid. Kindly request you with folded hands to help us and restore peaceful environments.

Please help them if anyone has humanity and power …

Friday, June 3, 2016

एक_बेटी_का_पत्र_पिता_के_नाम‬...

...पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ,
..आँसू छिपाते हो फेर कर नज़रे,
..इतना फीका मुस्कुराया न करो ..पापा मुझे छोड़ने आया न करो
... हिदायत से घर भर की लाइट्स बुझाते ,
... सोच कर भी न कितने सामान खरीदते ,
...गाड़ी का माइलेज चेक करते रहते ,
...मेरे हाथ में ए टी एम थमाया न करो ... पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ।
...पानी की बॉटल रखी या नही,
...टिकट कही भूली तो नही ,
...पर्स में खुले पैसे रखे या नही
..इतना नम प्यार जताया न करो ....पापा मुझे छोड़ने आया न करो ।
सीट के नीचे बैग जमाते ,
ध्यान रखना अकेली जा रही,
साथ की किसी महिला को बताते,
पल पल इतनी चिंता जताया न करो ...पापा मुझे छोड़ने आया न करो ।
पहुँचते ही कर देना फोन ,
अब कब होगा आना फिर तुम्हारा ,
रग रग कर देते हो तन्हा ,
उदासी से सर पर हाथ फिराया न करो ..आप स्टेशन आया न करो ।
मैं खामोश रीती हो जाती ,
जी भर ऐसे गले लगाया न करो ,
दूर तक देखती रह जाती हूँ बिखर कर,
ग़मगीन खड़े यू हाथ हिलाया न करो ,.. .....आप स्टेशन आया न करो ।
चप्पा चप्पा कर देते हो वीरान ,
रुन्धा गला बातो में छिपाया न करो,
मेरा आगा पीछा सोच सोच ,
अपना कलेजा दुखाया न करो,...... मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो ।
फ़ोन पे बात न सूझती आपको,
लो अपनी माँ से बात करो ,
बाद में पूछते उनसे ब्यौरा सारा ,
हमारे नाम पाई पाई के कागज़ बनवाया न करो.... आप स्टेशन आया न करो ।